मीर तक़ी मीर
फ़क़ीराना आये सदा कर चले
मियाँ ख़ुश रहो हम दुआ कर चले
जो तुझ बिन ना जीने को कहते थे हम
सो इस अहद को अब वफ़ा कर चले
कोई ना-उम्मीदाना करते निगाह
सो तुम हम से मुँह भी छिपा कर चले
बहुत आरज़ू थी गली की तेरी
सो याँ से लहू में नहा कर चले
दिखाई दिये यूँ कि बेख़ुद किया*
हमें आप से भी जुदा कर चले
जबीं सजदा करते ही करते गई
हक़-ए-बंदगी हम अदा कर चले
परस्तिश की याँ तक कि ऐ बुत तुझे
नज़र में सबों की ख़ुदा कर चले
गयी उम्र दर बंद-ए-फ़िक्र-ए-ग़ज़ल
सो इस फ़न को ऐसा बढ़ा कर चले
कहें क्या जो पूछे कोई हम से 'मीर'
जहाँ में तुम आए थे, क्या कर चले
* The famous song in Bazaar, so beautifully picturized on Supriya Pathak who looks extremely innocent and vulnerable. One of my all time favourites.
मियाँ ख़ुश रहो हम दुआ कर चले
जो तुझ बिन ना जीने को कहते थे हम
सो इस अहद को अब वफ़ा कर चले
कोई ना-उम्मीदाना करते निगाह
सो तुम हम से मुँह भी छिपा कर चले
बहुत आरज़ू थी गली की तेरी
सो याँ से लहू में नहा कर चले
दिखाई दिये यूँ कि बेख़ुद किया*
हमें आप से भी जुदा कर चले
जबीं सजदा करते ही करते गई
हक़-ए-बंदगी हम अदा कर चले
परस्तिश की याँ तक कि ऐ बुत तुझे
नज़र में सबों की ख़ुदा कर चले
गयी उम्र दर बंद-ए-फ़िक्र-ए-ग़ज़ल
सो इस फ़न को ऐसा बढ़ा कर चले
कहें क्या जो पूछे कोई हम से 'मीर'
जहाँ में तुम आए थे, क्या कर चले
* The famous song in Bazaar, so beautifully picturized on Supriya Pathak who looks extremely innocent and vulnerable. One of my all time favourites.


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