My Photo
Name:
Location: Bangalore, Karnataka, India

Tuesday, June 26, 2007

इंशा जी बहुत दिन बीत चुके - २

जब सूरज डूबे साँझ भए
और फैल रहा अंधियारा हो
किस साज की लय पर झनन-झनन
किस गीत का मुखड़ा जागा हो

इस ताल पे नाचते पेड़ों में
इक चुप-चुप बहती नदिया हो
हो चारों कोट सुगन्ध बसी
ज्यों जंगल पहना गजरा हो

यह अम्बर के मुख का आँचल
इस आँचल का रंग ऊदा हो
इक गोट रुपहले तारों की
और बीच सुनहरा चंदा हो

इस सुन्दर शीतल शांत समय
हाँ बोलो-बोलो फिर क्या हो?
वह जिसका मिलना नामुमकिन
वह मिल जाए तो कैसा हो?

0 Comments:

Post a Comment

<< Home