और तब राधा ने कहा...
सुनो मेरे मित्र!
यह जो मुझमें इसे, उसे, तुम्हें, अपने को-
कभी-कभी न समझ पाने की नादानी है न
इसे मत रोको
होने दो-
वह भी एक दिन हो-हो कर
रीत जायेगी...
-कनुप्रिया (धर्मवीर भारती)
यह जो मुझमें इसे, उसे, तुम्हें, अपने को-
कभी-कभी न समझ पाने की नादानी है न
इसे मत रोको
होने दो-
वह भी एक दिन हो-हो कर
रीत जायेगी...
-कनुप्रिया (धर्मवीर भारती)


0 Comments:
Post a Comment
<< Home