I love conflict. Of opinion.
वो कभी अपनी ज़फ़ा पर न हुआ शर्मिंदा
हम समझते रहे पत्थर भी पिघल जाते हैं
-बशीर बद्र
वे मुतमईन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता
मैं बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिए...
-दुष्यंत कुमार
हम समझते रहे पत्थर भी पिघल जाते हैं
-बशीर बद्र
वे मुतमईन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता
मैं बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिए...
-दुष्यंत कुमार


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