My Photo
Name:
Location: Bangalore, Karnataka, India

Sunday, September 28, 2014

उदास तुम

फिर उदास हो तुम !

सुना है मैंने
उन से
जो जानते हैं तुम्हें
मुझको भी
बता रहे थे
कुछ उदास हो तुम

{}

रंग उतरा हुआ-सा  रहता है
हमेशा
चुप चहकती है, ज़्यादातर
पुरानी शॉल जैसे ओढ़ ली हो
(प्यारी, मगर बहुत पुरानी)

दर्द  की कई परतें
चेहरे पर रहती हैं
बारीक़ सजी हुई

उम्र भी छोड़ने लगा है अब
सिलवटों में अपने तोहफ़े

तोहफ़े पसन्द नहीं ना तुमको
शायद इसीलिए
अब उदास हो तुम

{}

कुछ तो तन्हाई भी मुजरिम है
मग़र जज्ब का हुनर भी है तुमको
एक क़तरा रोशनाई भी
देख ले कोई
मुमकिन है !

कुछ जो तुमने लिखा भी होगा
सिर्फ और सिर्फ दिल के सफहों पर
(अब तक तो ग्रंथ छप चुके होंगे)

कोई पढ़ ले तो जान ही जाए
बात ऐसी भी क्या है आखिर
आखिर किसलिए
यूँ उदास हो तुम

{}

कुछ तो इमकान सब को  होता है
जज्ब की तासीर भाँप जाते हैं
बात निकले दूर तक पहुंचे
लोग चुप्पी से ताड़ जाते हैं

सलवटें, दर्द की बारीक़ परतें
इनसे होकर भी कथा आती है
ग़म किसी एक की तो मिल्कियत नहीं
हर कहानी में वही एक व्यथा आती है

सोचो तो 
मैं भी औरों की तरह सोचता हूँ
मानो जानता हूँ
कि क्यूँ उदास हो तुम

{}

चाँद छूने को बढ़े हाथ कभी
धूल कींचड़ में नहीं सनते हैं
थोड़ा मौसम का असर होगा वहाँ
दिन बिगड़ते हैं, खुद ही बनते हैं

कोई दिन यूँ ही काट लो हमदम
सर्द रातें भी बीत जाएँगी
ये उदासी हमेशा को नहीं
ख़ुशनुमा चाँदनी भी आएगी

देखो ना
मैं भी औरों की तरह हो गया हूँ
मान बैठा हूँ
कि उदास हो तुम

{}

और होने को ये भी मुमकिन है
कोई दुःख-दर्द-ज़दा मिल गया हो
राह में कुछ देख कर दिल बैठा हो
बॉस की झिड़की टाली जा रही हो
या कोई सपना बुरा-सा गया हो

या कोई अच्छी सी नॉवेल पढ़ने के बाद
उस से बाहर ना आना भा गया हो

कुछ भी मुमकिन है मगर शायद
बात झूठी है कि उदास हो तुम

{}

मेरा नम्बर तो अभी भी है वही
तुमको मालूम भी है, याद भी है
साल-दो-साल में कभी यूँ ही
याद कर लेना अगर याद आए

और कुछ हो हो मगर हमदम
इतना तो इल्म हो ही जाएगा
ज़िन्दगी कैसी कट रही है अब !
कौन सी नॉवेल है पढ़ने के लायक़ !!
अगली इतवार का प्रोग्राम क्या है !!!

और यह सब ना भी हो
तो भी क्या
पूछ तो सकते ही हैं हम
एक दूसरे से
क्या उदास हो तुम?
क्यूँ उदास हो तुम?

0 Comments:

Post a Comment

<< Home