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Monday, November 12, 2007

Just Married

रूठ के मुँह ना मोड़ियो
आँख मिलाई के बोल
पेंच पड़े ना बात में
मन के भेद को खोल

साँचा रिश्ता तभी चले
बीच में भेद ना होय
जीभ पे कड़वा लागे तो
सुर में अमरित घोल

साथ साथ ही पग मुड़ें
राह मुड़े जिस ओर
प्रेम पतंग चढ़ती रहे
थामे रखियो डोर

रहिमन धागा प्रेम का
मत तोड़ो चटकाय
टूटे से फिर ना मिले*
मिले गाँठ पड़ि जाय
-गुलज़ार

*टूटे तो फिर ना जुटे
जुटे गांठ पड़ि जाय
(अब्दुल रहीम खानखाना)

PS: I love Singapore Airlines.

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