ग़ालिब, कबीर और निदा फ़ाज़ली
(१)
तेरे वादे पे जिये हम
तो ये जान झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते
अगर ऐतबार होता...
(२)
अकथ कहानी प्रेम की
जेहि कछु कही न जाए
गूंगे के मुख सरकरा
खाए अरु मुसकाए...
(३)
हर आदमी में होते हैं
दस-बीस आदमी
जिसको भी देखना हो
कई बार देखना...
तेरे वादे पे जिये हम
तो ये जान झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते
अगर ऐतबार होता...
(२)
अकथ कहानी प्रेम की
जेहि कछु कही न जाए
गूंगे के मुख सरकरा
खाए अरु मुसकाए...
(३)
हर आदमी में होते हैं
दस-बीस आदमी
जिसको भी देखना हो
कई बार देखना...

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